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पेरियार जी के जीवन की कुछ महत्वपूर्ण बातें....

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पेरियार जी के जीवन की कुछ महत्वपूर्ण बातें.... यह 1977 की बात है मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका आई जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु में पेरियार की मूर्तियों के नीचे जो बातें लिखी हुई हैं,  वे आपत्तिजनक हैं और लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं इसलिए उन्हें हटाया जाना चाहिए। याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ईरोड वेंकट रामास्वामी पेरियार जो कहते थे, उस पर विश्वास रखते थे इसलिए उन के शब्दों को उन की मूर्तियों के पैडेस्टर पर लिखवाना गलत नहीं है। पेरियार की मूर्तियों के नीचे लिखा था- ‘ईश्वर नहीं है और ईश्वर बिलकुल नहीं है। जिस ने ईश्वर को रचा वह बेवकूफ है, जो ईश्वर का प्रचार करता है वह दुष्ट है और जो ईश्वर की पूजा करता है वह बर्बर है। पेरियार ई.वी. रामास्वामी ग्रेट पेरियार नायकर के ईश्वर से कुछ सवाल थे जो इस प्रकार है .... 1. क्या तुम कायर हो जो हमेशा छिपे रहते हो, कभी किसी के सामने नहीं आते?  2. क्या तुम खुशामद परस्त हो जो लोगों से दिन रात पूजा, अर्चना करवाते हो?  3.क्या तुम हमेशा भूखे रहते हो जो लोगों से मिठाई, दूध, घी आदि लेते रहते हो? 4. क्या त...

भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारतरत्न

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भारतरत्न   भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारतरत्न है। इस सम्मान के पदक का डिजाइन पीपल की पत्तानुकृति पर सामने 32 तीलियों का धम्मचक्र है। पीछे की तरफ भारत का राजचिह्न अशोक स्तम्भ है। भारत का राजचिह्न सारनाथ में स्थित अशोक के सिंहस्तंभ की अनुकृति है। मूलस्तंभ में शीर्ष पर एक दूसरे की ओरपीठ किए हुए चारसिंह हैं। सत्यमेव जयते

Dr. Bhim Rao Ambedkar-2

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                   Dr. Bhim Rao Ambedkar

Thought गौतम बुद्ध

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                        Namo Buddhay 🌺 धम्मप्रभात🌺            🥀दूसरों के दुखों में दुखी होना बहुत बड़ी बात नहीं है अपितु दूसरों की खुशी में खुश होना बहुत बड़ी बात है ! दूसरों के दुखों में आंसू बहाना, दूसरों की खुशी में एक झूठी मुस्कान बिखेरने से ज्यादा आसान है।🥀           🥀आज आदमी की मनोदशा यह हो गई है कि वह भले ही दूसरों के दुखों में संवेदना प्रकट कर भी दे मगर दूसरों की खुशियों में शामिल होना उसे कम अच्छा लगता है ! पहले लोग बड़े खुश रहते थे क्योंकि दूसरों की ख़ुशी इन्हें अपनी ही मालूम होती थी ! 🥀            🥀मगर आज का आदमी बड़ा ही दुखी रहता है क्योंकि अपनी ही खुशी उसे उधार की लगती है ! किसी के दुखों में आँसू बहा देना ही मानवता नहीं है अपितु किसी की ख़ुशी को देखकर ह्रदय में सच्ची प्रसन्नता का जन्म होना भी मानवता का लक्षण है।🥀                         🌺नमो बुद्धाय 🌺...

Lord Gautam Buddha

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                        Namo Buddhay

Dr. Bhim Rao Ambedkar- 1

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                Dr. Bhim Rao Ambedkar

Samrat Ashok Post-1

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⚔️ __________जय_सम्राट_अशोक__________ ⚔️     ⚔️_________जय_मौर्यवंशी__________⚔️

सम्राट अशोक Post-2

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                        जय सम्राट अशोक

गौतम बुद्ध //सम्राट अशोक मौर्य// श्रीलंका

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राम रावण के युद्ध का तो पता नहीं  पर प्राचीन काल में सम्राट अशोक के बच्चे जरूर श्रीलंका गए थे और पूरा श्रीलंका बुद्धमय हो गया और न खून बहा न विरोध हुआ,  क्यों ??  क्योंकि पाटलिपुत्र में जो बैठा था उनकी दहाड़ से पूरा एशिया महाद्वीप थर्राता था और धाक थी धमक थी ठसक थी रुतबा था ⚔️ __________जय_सम्राट_अशोक__________ ⚔️     ⚔️_________जय_मौर्यवंशी__________⚔️

चक्रवर्ती सम्राट अशोक का परिचय

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  चक्रवर्ती सम्राट अशोक अखण्ड भारत के सबसे शक्तिशाली महान राजा हुए थे ।सम्राट अशोक  का जन्म 304 ईसा  पूर्व में हुआ था और  सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य था। इनके पिता का नाम सम्राट बिन्दुसार था। और इनकी मां का नाम धर्मा था।  इतिहास में सम्राट अशोक के अलावा इनके केवल तीन भाई सुसीम, विट अशोक और तिष्य का ही जिक्र मिलता है |मौर्य वंश के सभी राजाओं में से अशोक ने  सबसे लंबे समय तक शासन किया था।  इनका का राजकाल 269 से 232 ईसा पूर्व तक रहा था | 72 वर्ष की आयु में सम्राट अशोक की मृत्यु  हो  गई  थी|                                        चक्रवर्ती सम्राट अशोक इनका मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी तथा दक्षिण में मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान तक पहुँच गया था।आज का सम्पूर्ण भारत, पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यान्मार उस समय इन सा...

होली का रहस्य ( (होलिका कौन थी और क्यों जलाई जाती है

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 होली का रहस्य ( (होलिका कौन थी और क्यों जलाई जाती है। लखनऊ के पास हरदोई जिले में दो भाई रहते थे| जिनका नाम राजा हिरण्याक्ष और राजा हिरण्यकश्यप था | वो दोनों भाई मिलकर वहाँ राज करते थे | वहाँ के कुछ आर्यों ने मिल कर राज्य की भूमि पर कब्जा कर लिया था | फिर राजा हिरण्याक्ष ने आर्यों द्वारा कब्जा की हुई सम्पूर्ण भूमि को जीतकर अपने कब्जे में कर लिया|  यही से आर्यों और हिरण्याक्ष के बीच दुश्मनी शुरू हो गई | और आर्यों ने हिरण्याक्ष के खिलाफ षड़यंत्र रचना शुरू किया | फिर हिरण्याक्ष को विष्णु नामक आर्य राजा ने धोखे से मार दिया | जिसकी वजह से हिरण्याक्ष  के छोटे भाई राजा हिरण्यकश्यप ने अपने भाई के हत्यारे विष्णु की पूजा पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद को विष्णु ने नारद नामक आर्य से जासूसी कराकर उसे गुमराह किया और अपने झांसे में लेकर घर में फूट डलवा दी। प्रह्लाद गद्दार निकला और विष्णु से मिल गया तथा शराबियों की मंडली में पड़कर पूरी तरह आवारा हो गया। सुधार के तमाम प्रयास विफल हो जाने पर राजा ने उसे घर से निकाल दिया। अब प्रहलाद आर्यों की आवारा मंडली के सा...

चन्द्रगुप्त मौर्य का परिचय

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पूरा नाम                      चन्द्रगुप्त मौर्य जन्म                           340 BC जन्म स्थान                  पाटलीपुत्र , बिहार माता - पिता                 नंद, मुरा   पत्नी                            दुर्धरा बेटे                             बिंदुसार पोते                            अशोका , सुसीम , नंदा,....... मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त भारत के बहुत अच्छे शासक माने जाते है, जिन्होंने बहुत सालों तक शासन किया | चन्द्रगुप्त मौर्य एक ऐसे शासक थे, जो पुरे भारत को एकिकृत करने में सफल रहे थे , उन्होंने अपने अकेले के दम पर पुरे भारत पर शासन किया| पहल...

चंद्रगुप्त मौर्य कैसे बने सम्राट ?

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                    तीन सौ बीस ईसा पूर्व की बात है। मगध राज्य में नंद वंश के राजा धनानंद राज्य करते थे। मगध राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी, जिसे आज पटना के नाम से जाना जाता है ।  मगध साम्राज्य की सीमा उत्तर में गंगा से दक्षिण में विन्ध्य पर्वत तक, पूर्व में चम्पा से पश्‍चिम में सोन नदी तक फैला था |      इस साम्राज्य का राजा जोकि धनानंद था | वह धन का लोभी था | धनानंद अपने खजाने को भरने के लिए प्रजा पर तरह तरह के कर लगा पर बलपूर्वक वसूलता था | इसके कारण सारी जनता धनानंद के खिलाफ हो गई | पर इसका थोड़ा सा भी भय धनानंद को नहीं था | उस समय के सभी राजा विद्वानों  का बहुत आदर करते थे, पर धनानंद अपने अहंकार के कारण वो विद्वानों का भी निरादर कर दिया करता था अपने इसी व्यवहार के कारण उसने अपने दरबार में ही उस युग के महान् विद्वान और नीतिज्ञ चाणक्य का अपमान कर दिया | फिर उसी समय चाणक्य ने यह संकल्प लिया की नंद वंश का विनाश करके इस राज्य गद्दी पर एक सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति को बैठालूँगा |      ...